
बिजली काटे जाने को लेकर यह कहा गया है कि JBNL बकाया वसूली को लेकर अभियान चला रही है. इसी के तहत हेवी इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड पर कार्रवाई की गई.
झारखंड में डीवीसी के बकाए को लेकर केंद्र और राज्य के बीच एक बार फिर टकराव पैदा हो गया है. दरअसल, केंद्र सरकार ने डीवीसी का बकाया वसूलने के लिए राज्य सरकार के खाते से 714 करोड़ की तीसरी किस्त काट ली, जिसके बाद झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) ने केंद्र सरकार के उपक्रम एचईसी (HEC) की बिजली सप्लाई बकाए के नाम पर ठप कर दी. बिजली कटने के बाद HEC प्रबंधन ने जल्द भरपाई का आश्वासन दिया तब जाकर बिजली सप्लाई चालू की गई.
HEC ने 5 साल से नहीं चुकाया है बिल
हालांकि, बिजली काटे जाने को लेकर यह कहा गया है कि JBNL बकाया वसूली को लेकर अभियान चला रही है. इसी के तहत हेवी इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HEC) पर कार्रवाई की गई. बताया जा रहा है कि HEC पर 126 करोड़ रुपए से ज्यादा का बिजली बिल बकाया है और एचईसी कंपनी ने करीब 5 साल से बिजली का बिल नहीं चुकाया है.
सौतेला व्यवहार कर रही केंद्र सरकार’
इधर, DVC पर मचे इस बवाल को लेकर सूबे में सियासत भी तेज हो गई है. इस मामले पर बीजेपी (BJP) कांग्रेस (Congress) और जेएमएम (JMM) की तरफ से बयानबाजी जोरों पर है. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा कि कहीं ना कहीं केंद्र सरकार संघीय ढांचे को नुकसान पहुंचा रही है. राजेश ठाकुर ने केंद्र सरकार पर झारखंड के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप भी लगाया.
झारखंड की लगातार मदद कर रही केंद्र सरकार’
उन्होंने सवाल किया कि क्या डीवीसी पर केवल झारखंड का बकाया है बाकी बीजेपी शासित राज्यों का बकाया नहीं है? राजेश ठाकुर ने कहा कि अगर ऐसा है तो फिर उन राज्यों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है? मुद्दे पर JMM ने भी केंद्र सरकार को घेरा है. इधर, इस मुद्दे पर बीजेपी से राज्यसभा सांसद रमेश पोद्दार का भी बयान आया. उन्होंने कहा कि शोर मचाने की बजाए केंद्र और राज्य के उपक्रम आपस में हिसाब मिला लें और एक निश्चित राशि तय कर ली जाए ताकि किसी को शिकायत का मौका ना मिले. रमेश पोद्दार ने कहा कि केंद्र सरकार झारखंड की लगातार मदद कर रही है.











